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शिक्षा " कल और आज " ।

Posted On: 14 Mar, 2017 Contest में

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‘ शिक्षा ‘ ये एक एेसा शब्द है जिसका महत्व प्रत्येक व्यक्ति के जीवन मे एक अहम भूमिका निभाता है। प्रत्येक वह व्यक्ति जो अपने जीवन मे सफलता की सीढ़ी को चढ़ना चाहता है , उस व्यक्ति को सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए शिक्षा का परम ज्ञान होना अति आवश्यक होता है । आज से कई वर्ष पहले शिक्षा का स्तर अपने आप मे ही सर्वांगीण था । आज से कई वर्ष पहले एक विधार्थी कुछ नया सीखने को मिलेगा इस लालसा को मन मे रखकर अध्ययन किया करता था, और उसके इसी लालसारूपी कठिन परिश्रम का यह परिणाम होता था कि वह व्यक्ति एक सफल व श्रेष्ठ व्यक्ति बनकर दिखाता था । किन्तु यदि हम शिक्षा की तुलना कल के मुकाबले आज से करे तो आज का विधार्थी इस भाव को ध्यान मे रखकर नही पढ़ता कि उसे कुछ सीखने को मिलेगा बल्कि उसके मन की लालसा यह होती है कि दो दिन पढ़कर उसे पचास हजार प्रति माह की एक अच्छी सी सरकारी नौकरी मिल जाए । कल की शिक्षा प्रणाली और आज की शिक्षा प्रणाली मे जमीन आसमान का अंतर है । शिक्षा के इस बदलते दौर का एकमात्र दोषी केवल विधार्थी ही नही है बल्कि इसमे कुछ हद तक दोष उनको शिक्षा देने वाले कुम्हाररूपी शिक्षको का भी है । यदि बात आज से कई वर्ष पहले की शिक्षा की करे तो उस समय मे एक शिक्षक व विधार्थी का रिश्ता वास्तव मे गुरु शिष्य का रिश्ता होता था । किन्तु आज की शिक्षा प्रणाली ने उस गुरू शिष्य के रिश्ते को एक ग्राहक व व्यवसायी के रिश्ते मे परिवर्तित कर दिया है । कई वर्ष पहले की शिक्षा प्रणाली मे एक शिक्षक एक विधार्थी को पढ़ाने मे अपना स्वार्थ न देखकर विधार्थी के भविष्य को ध्यान मे रखता था । किन्तु वर्तमान शिक्षा प्रणाली ठीक इससे विपरीत है। वर्तमान मे लगभग 70% शिक्षक एेसे है जिनको अपने स्वार्थ से मतलब होता है न कि विधार्थी के भविष्य से ।आज से पहले की शिक्षा प्रणाली पारदर्शी हुआ करती थी । किन्तु आज की शिक्षा प्रणाली मे पारदर्शिता न के बराबर ही रह गई है । वर्तमान समय के लोग शिक्षा के महत्व को धीरे धीरे अस्तित्व से बाहर करने मे लगे हुए हैं। आज के विधार्थी पाठ को समझकर याद न करने के बदले उसे तोते की तरह रटकर पढ़ना पंसद करते है , जबकि वह इस बात से अंजान है पढ़कर याद किया गया पाठ अजीवन याद रहता है और रटकर याद किया गया पाठ कुछ पल का मेहमान होता है । अंत मे मेरा यही मत है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली मे कई प्रकार के बदलावो की आवश्यकता है । जो कि एक विधार्थी के उज्जवल भविष्य के लिए नितांत आवश्यक है ।

प्रेषक : अमन सिंह (सोशल एक्टिविस्ट) बरेली
मो.8265876348

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